यूरिया-डीएपी का सरकारी दाम बना मजाक, अररिया में खाद की कालाबाजारी से किसान परेशान

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किसानों का कहना है कि डीएपी उर्वरक की सबसे अधिक किल्लत है. मिल भी रही है तो दुकानदारों द्वारा औने-पौने दामों पर बेची जा रही है. उर्वरक विक्रेता भी ऊपर से कम डीएपी मिलने की बात कहकर किसानों से मनमाफिक दाम वसूल रहे हैं. अधिकांश दुकानदारों द्वारा किसानों को रसीद भी नहीं दी जाती है. किसानों ने बताया कि सरकारी रेट के हिसाब से मांगने पर…
अररिया: बिहार के अररिया जिले में रासायनिक उर्वरक खासकर डीएपी की किल्लत से किसान परेशान हैं. बुआई के सीजन में किसानों को सबसे अधिक डीएपी की जरूरत पड़ती है. ऐसे में डीएपी की आवक कम रहने के चलते किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं मिल रही है. जिले में स्थिति यह है कि डीएपी उर्वरक के लिये किसान कृषि विभाग के कार्यालय तक का दरवाजा खटखटा रहे हैं. कृषि अधिकारी भी मानते हैं कि जिस हिसाब से किसानों द्वारा डीएपी की डिमांड की जा रही है उस हिसाब से सप्लाई नहीं हो रही है. हालांकि, किसानों को बुआई में डीएपी की जगह पर जैविक समेत दूसरे उर्वरक का इस्तेमाल भी करना चाहिये ताकि डीएपी पर निर्भरता कम हो सके.
1700-1800 रूपए देना पड़ रहा दाम
बिहार के अररिया जिले में किसानों को खाद सही दामों में नहीं मिलने से किसानों को काफी परेशानी का समाना करना पड़ रहा है. बता दें कि डीएपी खाद अररिया जिले में 1700-1800 रूपए से अधिक भावों में मिल रहा है. जबकि इसका सरकारी रेट 1300 रुपये है.
बाजार में सरकारी दाम से नहीं उपलब्ध है खाद
अररिया जिले के किसान दिवाकर ठाकुर ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि खाद के बढ़ते दामों से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि जिस डीएपी खाद का सरकारी रेट महज 1300 रूपया है वही खाद यहां के स्थानीय किसानों को लोकल बाजारों में 1700 से 1800 रूपया में खरीदना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि यूरिया खाद भी सरकारी दामों के हिसाब से नहीं मिल पा रही है. यही सरकारी यूरिया ब्लैक में महंगे दाम में मिल रही है. इस पर लोगों का कहना है कि अगर ब्लैक में यूरिया मिल रही है इसका मतलब है कि यूरिया जिले में आ तो रही है किसानों के नाम पर लेकिन, किसानों से पहले वो दलालों के पास पहुंचा दी जा रही है. इसके बाद दलालों के जरिए वही खाद महंगी होकर किसानों के पास पहुंचती है.
क्या कहते हैं किसान
किसानों का कहना है कि डीएपी उर्वरक की सबसे अधिक किल्लत है. मिल भी रही है तो दुकानदारों द्वारा औने-पौने दामों पर बेची जा रही है. उर्वरक विक्रेता भी ऊपर से कम डीएपी मिलने की बात कहकर किसानों से मनमाफिक दाम वसूल रहे हैं. अधिकांश दुकानदारों द्वारा किसानों को रसीद भी नहीं दी जाती है. किसानों ने बताया कि सरकारी दर पर मांगने पर विक्रेताओं द्वारा उर्वरक उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है. खासकर ऐसे किसान जिनके पास जरूरी कागजात नहीं रहते हैं उनको उर्वरक लेने में पसीना छूट जाता है. ऐसे में किसानों को विवश होकर महंगे दामों पर उर्वरक खरीदकर खेतों में डालना पड़ रहा है.
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