Som Pradosh Vrat Katha: आज सोम प्रदोष व्रत, शिव पूजन के समय अवश्य पढ़ें संपूर्ण पौराणिक कथा

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Som Pradosh Vrat Katha 2026: सोम प्रदोष व्रत आज है. सोमवार और प्रदोष तिथि, दोनों ही दिन देवों के देव महादेव को समर्पित माने जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भक्त श्रद्धा और नियम से सोम प्रदोष व्रत रखते हैं और कथा का श्रवण करते हैं, उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है. यही कारण है कि शिव भक्त इस दिन पूजा के साथ व्रत कथा को भी बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं. सोम प्रदोष व्रत कथा यहां पढ़ें…

Som Pradosh Vrat Katha 2026: आज सोम प्रदोष तिथि का व्रत किया जा रहा है. हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. जब त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ सोम प्रदोष व्रत कथा सुनने या पढ़ने की भी विशेष परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि व्रत के साथ कथा श्रवण करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है. साथ ही सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. यहां पढ़ें संपूर्ण सोम प्रदोष व्रत कथा…
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी. उसके पति का स्वर्गवास हो गया था. उसका अब कोई आश्रयदाता नहीं था, इसलिए सुबह सुबह वह अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी. भिक्षाटन से ही वह अपना और अपनी संतान का पेट पालती थी. एक दिन ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में कराहता हुआ मिला. ब्राह्मणी दयावश उसे अपने घर ले आई. वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था. शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और राज्य पर नियंत्रण कर लिया था, इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था.
राजकुमार ब्राह्मण-पुत्र के साथ ब्राह्मणी के घर रहने लगा. एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा और उस पर मोहित हो गई. अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई. उनको भी राजकुमार अच्छा लगा. कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को भगवान शंकर ने सपने में आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए. जैसा भगवान शिव ने कहा, वैसा ही राजा ने कर दिया.
ब्राह्मणी हमेशा से प्रदोष व्रत करती थी. उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और पिता के राज्य को फिर से प्राप्त कर आनन्दपूर्वक रहने लगा. राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया. ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के माहात्म्य से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही हे प्रभु दीनानाथ भगवान शंकर अपने अन्य सभी भक्तों के दिन भी फेरते रहें. आपकी कृपा हम सभी पर बनी रहे.
हर हर महादेव! हर हर महादेव! भगवान शंकर की जय, माता पार्वती की जय
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें
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