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धौलपुर के पैरा एथलीट प्रवीण शर्मा ने 13.31 मीटर थ्रो से रचा इतिहास

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Dholpur Hindi News: राजस्थान के धौलपुर जिले के पैरा एथलीट प्रवीण शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 13.31 मीटर का दमदार थ्रो कर पैरालंपिक क्वालीफिकेशन मार्क पार कर लिया है. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने इतिहास रचते हुए अपने जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है. प्रवीण शर्मा की इस सफलता से खेल जगत में खुशी की लहर है. उनकी मेहनत और लगन ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत इरादों के साथ बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.

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धौलपुर: राजस्थान के धौलपुर जिले के बसेड़ी उपखंड के छोटे से गांव बांसरई के पैरा एथलीट प्रवीण शर्मा ने अपनी शानदार उपलब्धि से पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है. उन्होंने विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 2026 में शॉटपुट स्पर्धा में 13.31 मीटर का थ्रो कर पैरालंपिक क्वालीफिकेशन मार्क पार कर इतिहास रच दिया. इस उपलब्धि के साथ प्रवीण शर्मा इस प्रतिस्पर्धा में 13 मीटर से अधिक थ्रो करने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बन गए हैं. उनकी इस शानदार उपलब्धि पर पूरे इलाके में खुशी की लहर है.

नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 2026 में प्रवीण शर्मा ने शॉटपुट की एफ-11 श्रेणी में हिस्सा लिया. प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने 13.31 मीटर का दमदार थ्रो किया, जो पैरालंपिक के लिए तय 13 मीटर के क्वालीफिकेशन मार्क से भी अधिक है. इस शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने शॉटपुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे
इसके अलावा प्रवीण ने डिस्कस थ्रो में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने 32.96 मीटर का थ्रो कर रजत पदक हासिल किया. एक ही प्रतियोगिता में दो पदक जीतकर प्रवीण ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. अब वह इसी साल जापान में होने वाली सीनियर एशियन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

प्रवीण शर्मा का सफर आसान नहीं रहा. उनका जन्म धौलपुर जिले में हुआ था. जब वह सिर्फ डेढ़ साल के थे, तब उन्हें स्टीवंस जॉनसन सिंड्रोम नाम की गंभीर बीमारी हो गई थी. इस बीमारी के कारण उनकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई. हालांकि इस मुश्किल समय में उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया.

प्रवीण के दादा ने उन्हें संभाला और कभी हिम्मत नहीं हारने दी. आंखों की रोशनी जाने के बावजूद उन्होंने प्रवीण को खेलों के लिए प्रेरित किया. परिवार के सहयोग और अपने मजबूत हौसले की बदौलत प्रवीण ने खेलों में आगे बढ़ने का फैसला किया.

खेल करियर को आगे बढ़ाया
प्रवीण के पिता ब्रजेश शर्मा किसान हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया. प्रवीण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई धौलपुर से पूरी की. फिलहाल वह जयपुर स्थित राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संघ में पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में नियमित प्रशिक्षण लिया और अपने खेल करियर को आगे बढ़ाया.

धुंधलापन या गंभीर मामलों में अंधापन भी हो सकता है
आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर अरुण शर्मा ने बताया स्टीवंस जॉनसन सिंड्रोम एक दुर्लभ बीमारी है, जो करीब 10 लाख लोगों में से एक या दो लोगों को ही होती है. इस बीमारी में आंखों की आंसू बनाने वाली ग्रंथियां प्रभावित हो जाती हैं, जिससे आंखों में सूखापन बढ़ जाता है. रोशनी बर्दाश्त नहीं हो पाती और कॉर्निया पर निशान पड़ने से धुंधलापन या गंभीर मामलों में अंधापन भी हो सकता है.

कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रवीण शर्मा ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले मजबूत हों तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती. उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ धौलपुर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है.

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Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें


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